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अब चेक बाउंस पर होगी सख्त सजा! जानिए नए कानून में कितने साल की हो सकती है जेल

क्या आपने हाल ही में किसी को चेक दिया है? अब एक छोटी सी गलती पर दो साल की जेल और भारी जुर्माना तय है! जानिए नया कानून क्या कहता है, कैसे बचें इस कानूनी संकट से और किन बातों का रखना है ध्यान – नहीं तो पछताना पड़ सकता है ताउम्र!

By Andrea Mathews
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अब चेक बाउंस पर होगी सख्त सजा! जानिए नए कानून में कितने साल की हो सकती है जेल

चेक बाउंस-Cheque Bounce के मामले अब केवल बैंक की एक तकनीकी समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि इसे भारतीय कानून में एक गंभीर आर्थिक अपराध माना गया है। परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instruments Act, 1881) की धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा करता है, या खाते में पर्याप्त राशि न होने के बावजूद चेक जारी करता है, तो उसे जेल की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

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चेक बाउंस पर दो साल तक जेल और दोगुना जुर्माना

धारा 138 के तहत यदि कोई चेक बाउंस होता है, तो दोषी व्यक्ति को अधिकतम दो साल की जेल हो सकती है या फिर चेक राशि के दोगुने तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। कुछ मामलों में अदालत दोनों ही सजा एक साथ भी दे सकती है। यह सजा उन मामलों में विशेष रूप से लागू होती है जहां जारीकर्ता जानबूझकर भुगतान से बचता है और पीड़ित को नुकसान पहुंचाता है।

कानूनी प्रक्रिया: चेक बाउंस के बाद क्या करें

चेक बाउंस होने पर सबसे पहला कदम होता है—नोटिस भेजना। प्राप्तकर्ता को चेक बाउंस होने के 30 दिनों के भीतर जारीकर्ता को लिखित नोटिस भेजना होता है। इस नोटिस में 15 दिनों का समय दिया जाता है, ताकि वह व्यक्ति भुगतान कर सके। यदि वह तय समय में भुगतान नहीं करता, तो प्राप्तकर्ता 30 दिनों के भीतर अदालत में शिकायत दर्ज कर सकता है। यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शी है बल्कि प्राप्तकर्ता को न्याय दिलाने की गारंटी भी देती है।

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न्यायपालिका का रुख अब और सख्त हो चुका है

पिछले कुछ वर्षों में चेक बाउंस के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसके चलते अदालतों ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि चेक बाउंस करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट का मानना है कि यदि इस तरह की लापरवाहियों पर समय रहते सख्ती न की जाए, तो व्यापारिक और वित्तीय लेनदेन की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी।

बचाव के उपाय

चेक जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि खाते में पर्याप्त धनराशि हो। चेक पर सभी जानकारियां स्पष्ट रूप से भरें, हस्ताक्षर बैंक रिकॉर्ड से मेल खाते हों और चेक की वैधता पूरी हो। अगर चेक पुराना हो गया है या उसमें कोई त्रुटि है, तो उसे जारी न करें। इन छोटी-छोटी सावधानियों से आप एक बड़ा कानूनी संकट टाल सकते हैं।

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Andrea Mathews
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